गैंगस्टर जोगिंदर ग्योंग 19 साल की उम्र में पहला मर्डर और फिलीपींस डिपोर्शन

जोगिंदर ग्योंग उर्फ जोगा डॉन का अपराधी बनने का सफर, सुरेंद्र ग्योंग से संबंध, पैरोल, 2017 का हत्याकांड, विदेश भागना और 2025 में फिलीपींस से वापसी।
कैथल /15 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
हरियाणा के आपराधिक इतिहास में कैथल जिले का ग्योंग गांव लंबे समय तक सुर्खियों में रहा है। इसी गांव का रहने वाला जोगिंदर सिंह उर्फ जोगिंदर ग्योंग, जिसे जरायम की दुनिया में 'जोगा डॉन' और फर्जी पहचान 'कांत गुप्ता' के नाम से भी जाना जाता है, राज्य के सबसे खतरनाक और कुख्यात अपराधियों में शुमार रहा है। उस पर हत्या, रंगदारी, जबरन वसूली, अपहरण, जानलेवा हमले और अवैध हथियारों की तस्करी जैसे दो दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
जोगिंदर ग्योंग के अपराधी बनने के पीछे उसके पारिवारिक माहौल, गांव की स्थानीय रंजिशों और उसके बड़े भाई सुरेंदर ग्योंग का सीधा हाथ माना जाता है। ग्योंग गांव में 1990 के दशक में शुरू हुई आपसी गुटबाजी और गैंगवार ने जोगिंदर को बहुत छोटी उम्र में ही अपराध के रास्ते पर धकेल दिया था। परिवार में आर्थिक और सामाजिक तनातनी के चलते वह पढ़ाई-लिखाई छोड़कर अपने भाई के साथ वारदातों को अंजाम देने लगा था।
सरकारी पुलिस रिकॉर्ड और जांच रिपोर्टों के मुताबिक, जोगिंदर ग्योंग ने महज 19 साल की उम्र में जरायम की दुनिया में पहला कदम रखा और अपनी पहली हत्या की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कैथल व आसपास के इलाकों में अपने खौफ का साम्राज्य स्थापित करना शुरू कर दिया। उसकी आपराधिक गतिविधियों के कारण हरियाणा पुलिस ने उसे अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल किया था।
जोगिंदर ग्योंग के पारिवारिक आपराधिक इतिहास की बात करें तो उसका सगा भाई सुरेंदर ग्योंग भी हरियाणा का एक जाना-माना कुख्यात गैंगस्टर था। सुरेंदर ग्योंग का नेटवर्क इतना मजबूत था कि उस समय पुलिस के लिए उसे पकड़ना बेहद चुनौती बना हुआ था। हालांकि, बाद में हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस टीम ने एक भीषण मुठभेड़ के दौरान सुरेंदर ग्योंग को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।
सुरेंदर ग्योंग के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद जोगिंदर ग्योंग पूरी तरह से बौखला गया था। उसके मन में अपने भाई के मारे जाने का गहरा गुस्सा था और वह इसके लिए अपने ही क्षेत्र के कुछ लोगों को जिम्मेदार मानता था। उसे शक था कि कैथल के स्थानीय ठेकेदार जयदेव ने पुलिस को उसके भाई की मुखबिरी दी थी, जिसकी वजह से पुलिस सुरेंदर तक पहुँच सकी थी।
साल 2006 में कैथल के प्रसिद्ध प्लाईवुड व्यापारी नरेंद्र अरोड़ा की सरेआम हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड ने पूरे राज्य के व्यापारी वर्ग को हिलाकर रख दिया था। जांच के दौरान इस वारदात में जोगिंदर ग्योंग और उसके साथियों की सीधी संलिप्तता पाई गई। अदालत में चली लंबी सुनवाई के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जोगिंदर ग्योंग को इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सजा काटने के दौरान जोगिंदर ग्योंग ने कानून की कमियों का फायदा उठाना शुरू किया। वह जेल से पैरोल हासिल करने की फिराक में रहता था। साल 2017 में जब वह पैरोल पर जेल से बाहर आया, तो उसने अपने भाई की मौत का बदला लेने की योजना को अंजाम दिया। पैरोल की अवधि के दौरान ही उसने ठेकेदार जयदेव की हत्या करवा दी और इसके बाद वापस जेल लौटने के बजाय फरार हो गया।
पैरोल जंप करने के बाद जोगिंदर ग्योंग ने भारत छोड़ने की साजिश रची। उसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 'कांत गुप्ता' के नाम से एक फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनवाया और भारतीय सीमाओं को पार करके विदेश भागने में कामयाब हो गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वह नेपाल के रास्ते अलग-अलग दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में अपनी पहचान छिपाकर रहने लगा और वहां से भी अपने गुर्गों के जरिए वसूली का नेटवर्क चलाता रहा।
भारतीय जांच एजेंसियों, हरियाणा पुलिस और इंटरपोल के बीच चले लंबे समन्वय के बाद आखिरकार जोगिंदर ग्योंग को फिलीपींस में ट्रेस कर लिया गया। वह वहां फर्जी नाम और पहचान के साथ छुपा हुआ था। कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद फरवरी 2025 में उसे फिलीपींस प्रशासन द्वारा डिपोर्ट (निर्वासित) करके भारत वापस लाया गया, जिसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार कर कड़ी सुरक्षा वाली जेल में भेज दिया गया।
जोगिंदर ग्योंग को अपने आपराधिक करियर के दौरान कई बार कानूनी प्रक्रिया के तहत पैरोल मिली। लेकिन उसने लगभग हर बार पैरोल की शर्तों का उल्लंघन किया। 2017 की पैरोल के दौरान उसने न केवल हत्या की वारदात को अंजाम दिया, बल्कि देश छोड़कर फरार भी हो गया। अदालत और जेल प्रशासन की रिपोर्टों में उसकी पैरोल हिस्ट्री को अत्यधिक संवेदनशील और आपराधिक प्रवृत्तियों से भरा माना गया है।
कई बार आम जनता और मीडिया विमर्श में गुरमीत राम रहीम और जोगिंदर ग्योंग की पैरोल को लेकर तुलना की जाती है, लेकिन कानूनी और आपराधिक दृष्टिकोण से दोनों मामलों में बड़ा अंतर है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को साध्वी यौन शोषण और हत्या के मामलों में सजा हुई है, और उसे जेल नियमों के तहत औपचारिक अर्जी देने पर सरकार व जेल प्रशासन द्वारा पैरोल या फरलो दी जाती रही है।
दूसरी ओर, जोगिंदर ग्योंग एक सक्रिय हार्डकोर गैंगस्टर और शूटर श्रेणी का अपराधी है। राम रहीम ने हर बार पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद तय समय पर जेल में आत्मसमर्पण किया है और नियमों के दायरे में रहा है, जबकि जोगिंदर ग्योंग ने पैरोल मिलते ही नई हत्या की वारदात की, फर्जी पासपोर्ट बनाया और देश छोड़कर भाग गया। यही कारण है कि अदालतें गैंगस्टरों की पैरोल पर बेहद सख्त रुख अपनाती हैं।
15 सितंबर 2026 तक की अद्यतन स्थिति के अनुसार, जोगिंदर ग्योंग भारत की उच्च सुरक्षा वाली जेल में बंद है। उस पर दर्ज पुराने मामलों और पैरोल के दौरान किए गए नए अपराधों के साथ-साथ फर्जी दस्तावेजों पर विदेश भागने के मामलों में भी अदालत में कड़ी सुनवाई चल रही है। जांच एजेंसियां उसके विदेशी वित्तीय संपर्कों और मददगारों के बारे में भी गहन पूछताछ कर रही हैं।