गुरुग्राम के पंचकोश आश्रम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दौरान हुआ गणेश चतुर्थी और सप्त ऋषि पूजन

गुरुग्राम के पंचकोश आश्रम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दौरान हुआ गणेश चतुर्थी और सप्त ऋषि पूजन

गुरुग्राम के पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम पंचकोश आश्रम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ चल रहा है। इस महायज्ञ के अंतर्गत गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर दो महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए हैं। ये दोनों धार्मिक अनुष्ठान पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न किए गए हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य और मार्गदर्शन में ये अनुष्ठान हुए हैं। इस आयोजन की जानकारी धार्मिक अनुष्ठान के प्रवक्ता के द्वारा दी गई है।

भगवान गणेश और सप्त ऋषियों का महत्व

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने इस अवसर पर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता और मंगल के अधिष्ठाता हैं। वहीं दूसरी और सप्त ऋषि भारतीय वैदिक ज्ञान और तपस्या की महान परंपरा के प्रतीक हैं। गणेश पूजन और सप्त ऋषि पूजन-हवन दोनों ही अनुष्ठान मानव जीवन में संदेश देते हैं। ये अनुष्ठान मानव जीवन में धर्म, ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यज्ञ का मूल उद्देश्य व्यक्तिगत कल्याण के साथ जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही यज्ञ का उद्देश्य समाज, राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के मंगल की भावना को सशक्त करना है।

AtalHind की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुए अनुष्ठान

महायज्ञ के यज्ञाचार्य आचार्य तेजमणि त्रिपाठी के निर्देशन में यह कार्यक्रम हुआ है। विद्वान आचार्यों एवं ब्राह्मणों द्वारा दोनों अनुष्ठानों को शास्त्रोक्त एवं वैदिक विधि से संपन्न कराया गया है। मंत्रोच्चार, देव आवाहन, पूजन, हवन एवं आहुतियों की पूरी प्रक्रिया यज्ञाचार्य के मार्गदर्शन में ही पूरी की गई है।

गणेश चतुर्थी और सप्त ऋषि का विशेष पूजन

गणेश चतुर्थी के अवसर पर सर्वप्रथम प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। गणपति जी का आवाहन करके उन्हें पुष्प, अक्षत, दूर्वा, मोदक एवं विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और गणेश वंदना के बीच विशेष हवन का आयोजन किया गया था। यज्ञाग्नि में आहुतियां समर्पित कर विघ्नों के निवारण की प्रार्थना की गई। इसके अलावा सुख-समृद्धि और लोककल्याण की भी प्रार्थना की गई है। आश्रम परिसर में गणपति वंदना के दौरान पूरा वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो उठा था। इसके साथ ही सप्त ऋषियों का विशेष पूजन एवं हवन भी आयोजित किया गया था। वैदिक परंपरा के अनुसार सप्त ऋषियों का आवाहन कर उनका पूजन-अर्चन किया गया है। यज्ञाग्नि में विशेष आहुतियां भी अर्पित की गई हैं। ऋषि परंपरा को भारतीय ज्ञान, तप, साधना और वैदिक संस्कृति की आधारशिला बताया गया है। इस अनुष्ठान में सनातन धर्म की अखंड परंपरा और ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई है।

उपस्थित गणमान्य लोग और कामनाएं

इस अवसर पर कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे हैं। डॉ. विनय मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी, देव नारायण शुक्ल एवं यतींद्र उपाध्याय सहित कई श्रद्धालुजन उपस्थित थे। सभी ने गणेश पूजन एवं सप्त ऋषि पूजन-हवन में सहभागिता की है। इसके साथ ही सभी ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया है। दोनों धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से लोककल्याण की कामना की गई है। इसके अलावा धर्मरक्षा, राष्ट्र की उन्नति और सर्वजन के सुख-शांति की भी कामना की गई है। इस कार्यक्रम के प्रेषक विवेकानंदगिरि देऊरा काशीपुर हैं।

Share:

Comments

Leave a comment