रेवाड़ी के सोमाणी इंस्टिट्यूट में हर्षोल्लास से मनाई गई गांधी-शास्त्री जयंती, स्वतंत्रता सेनानी आर.डी. सोमाणी को दी श्रद्धांजलि

रेवाड़ी के सोमाणी इंस्टिट्यूट में हर्षोल्लास से मनाई गई गांधी-शास्त्री जयंती, स्वतंत्रता सेनानी आर.डी. सोमाणी को दी श्रद्धांजलि

रेवाड़ी में सोमाणी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एंड फार्मेसी में महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के मैनेजमेंट, स्टाफ एवं विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री जी के छायाचित्रों व स्वतंत्रता सेनानी आर.डी. सोमाणी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर फूल चढ़ाए।

यह संस्थान स्वतंत्रता सेनानी स्व. आर.डी. सोमाणी जी की याद में बनाया गया है और आज ही उनका श्राद्ध व पुण्यतिथि भी है। स्वतंत्रता सेनानी आर.डी. सोमाणी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वे खोल गांव से थे, जिन्होंने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर ठाकुर राम सिंह व साथियों के साथ मिलकर सिविल मूवमेंट में सक्रिय भूमिका निभाई और देश को आजादी दिलाने में अहम योगदान दिया।

स्वतंत्रता सेनानी आर.डी. सोमाणी का देश की आजादी में योगदान

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वे सच्चे देशभक्त थे। आजादी की लड़ाई में उनका जो योगदान रहा, उसे भुलाया नहीं जा सकता। अंग्रेज सरकार द्वारा अनेक यातनाएं दिए जाने पर भी वे अडिग रहे, उनका मनोबल कभी कम नहीं हुआ। देश को आजाद कराने के लिए वे लगातार संघर्ष करते रहे और उन्होंने सैकड़ों युवाओं को आजादी की लड़ाई में अपनी आहुति डालने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी अहम योगदान दिया। गांव में स्कूल-कॉलेज की स्थापना करवाई, जिससे ग्रामीण लोग शिक्षित होकर आधुनिक भारत निर्माण में सहयोग दे रहे हैं। इस अवसर पर एकेडमिक हेड डॉ. प्रो. नविता ने कहा कि बचपन से हमने किताबों में महात्मा गांधी के महान आदर्श विचारों के बारे में पढ़ा और सुना है, जिसका सही अमल करके हम बेशक एक अच्छे इंसान बन सकते हैं।

महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर प्रकाश

2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी का देश को आजाद कराने में बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने सत्य और अहिंसा का पालन करते हुए जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया है। इन्हीं योगदानों को जीवित रखने और उनका प्रचार करने के मकसद से हर साल गांधी जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। उनके महान कार्य व विचारों की वजह से 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय पर्व का दर्जा दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि शास्त्री परिवार व सोमाणी परिवार के बीच राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक व राजनीतिक विषयों पर अक्सर विवेचना होती रहती थी। जहाँ महात्मा गांधी ने सिविल मूवमेंट को सही ढंग से चलाया, वहीं आजाद हिन्दुस्तान में शास्त्री जी ने किसान व नौजवान को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।

आज के ही दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म मुगलसराय के एक निर्धन परिवार में हुआ था। स्वाभिमान और साहस के गुण शास्त्री जी को विरासत में मिले थे। शास्त्री जी महात्मा गांधी से प्रभावित थे और उनके नेतृत्व में संचालित स्वाधीनता आंदोलन में भाग लेने के कारण कई बार जेल यात्रा भी करनी पड़ी। उनके योगदान को भारत की जनता कभी भूल नहीं सकती।

इस मौके पर डॉ. प्रो. आरती चौहान, प्रो. जगबीर सिंह ढिल्लों, प्रो. राहुल चौहान, प्रो. प्रीति यादव, प्रो. रमेश गुर्जर, प्रो. वैशाली, एडमिन हेड राखी ढींगरा सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

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