गुरुग्राम में बना देश का पहला तीर्थंकर वनम्, वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने किया उद्घाटन

गुरुग्राम में बना देश का पहला तीर्थंकर वनम्, वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने किया उद्घाटन

गुरुग्राम में जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) गुरुग्राम चैप्टर फाउंडेशन की ओर से देश के पहले तीर्थंकर वनम् की स्थापना की गई है। इस वन का उद्घाटन पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने शनिवार को किया है।

  • गुरुग्राम में स्थापित हुआ देश का पहला तीर्थंकर वनम्।
  • पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने किया उद्घाटन।
  • अरावली की श्रृंखला में विकसित किया गया है यह वन।
  • इस परिसर में बनाए गए हैं कुल 24 ध्यान स्थल।

अरावली की श्रृंखला में विकसित हुआ देश का पहला तीर्थंकर वनम्

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गुरुग्राम में जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) गुरुग्राम चैप्टर फाउंडेशन की ओर से अरावली की श्रृंखला में देश का पहला तीर्थंकर वनम् स्थापित किया गया है। इस देश के पहले तीर्थंकर वनम् का उद्घाटन शनिवार को पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने किया है। इस उद्घाटन समारोह के दौरान मंत्री राव नरबीर सिंह ने तीर्थंकर वनम् में भ्रमण भी किया है। इसके साथ ही उन्होंने वहां पर पौधारोपण भी किया है। हरियाणा सरकार के वन विभाग के साथ हुए एमओयू के तहत आवंटित सरकारी वन भूमि पर यह तीर्थंकर वनम् विकसित किया गया है। इस विशेष कार्यक्रम में पूर्व एडीजीपी अनिल राव ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

मंत्री राव नरबीर सिंह ने दी शुभकामनाएं

उद्घाटन समारोह के दौरान मंत्री राव नरबीर सिंह ने जीतो संस्था को इस बेहतरीन पहल के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संस्था को पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार काम करते रहने के लिए भी प्रेरित किया है। राव नरबीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वन्य जीव सुरक्षा सप्ताह सरकार की ओर से मनाया जा रहा है। वन प्रेमियों के लिए जीतो की ओर से यह एक बहुत ही अच्छी शुरुआत की गई है। हर किसी व्यक्ति की इस तरह के नेक कार्यों में अपनी भागीदारी होनी चाहिए। राव नरबीर सिंह ने आगे कहा कि जीतो ने महापुरुषों का स्मरण करते हुए जिस सोच के साथ इस तीर्थंकर वनम् को स्थापित किया है, उसकी प्रेरणा समाज में जाएगी। उन्होंने यह भी आह्वान किया कि हर समाज के व्यक्ति को इस तरह की शुरुआत करनी चाहिए।

तीर्थंकर वनम् परिसर में बनाए गए हैं 24 ध्यान स्थल

इस अवसर पर कार्यक्रम में जीतो अपेक्स के निदेशक रमन जैन और जीतो एनवायरमेंट एवं सस्टेनिबिलिटी के चेयरमैन आनंद चोरडिया उपस्थित रहे। इसके अलावा अमन फाउंडेशन के संस्थापक एवं जीतो नॉर्थ जोन के एनवायरनमेंट एंड सस्टेनिबिलिटी के संयोजक अनिल जैन भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जीतो गुरुग्राम चैप्टर के चेयरमैन संजय जैन और निवर्तमान चेयरमैन जीतो गुरुग्राम चैप्टर शैलेश जैन ने भी भाग लिया। परियोजना समन्वयक इंदु जैन, मुख्य सचिव अभिक जैन और मानव आवाज संस्था के संयोजक अभय जैन एडवोकेट भी वहां उपस्थित थे। श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैन बारादरी के प्रधान नरेश कुमार जैन और सेक्टर-14 जैन समाज के प्रधान नरेश जैन समेत अनेक लोग इस मौके पर मौजूद रहे। आपको बता दें कि इस तीर्थंकर वनम् परिसर में कुल 24 ध्यान स्थल बनाए गए हैं। यहाँ हर स्थल 24 जैन तीर्थंकरों में से एक को पूरी तरह से समर्पित है।

देश के अन्य स्थानों पर भी स्थापित किए जाएंगे तीर्थंकर वनम्

अपने संबोधन के दौरान जीतो एनवायरनमेंट एवं सस्टेनिबिलिटी के चेयरमैन आनंद चोरडिया ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि जीतो बेशक एक सामाजिक संस्था है, लेकिन यह संस्था देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर मिशन में पूरी तरह से भागीदार है। चाहे जल मिशन हो, एक पेड़ मां के नाम हो, राष्ट्रीय हरित मिशन हो, बैंबू मिशन हो या फिर स्वच्छता मिशन हो, हर मिशन को संस्था की ओर से अपने एजेंडे में शामिल किया गया है। इन सभी मिशनों पर जमीनी स्तर पर बहुत तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज यहां पर स्थापित किए गए तीर्थंकर वनम् की तरह ही इसे देश के अन्य स्थानों पर भी स्थापित किए जाएंगे। जैन समाज के 24 तीर्थंकरों का स्मरण करते हुए जीतो 24 तीर्थंकर वनम् स्थापित कर रहा है। इसकी शुरुआत गुरुग्राम से कर दी गई है और पहले चरण में 24 तीर्थंकर वनम् स्थापित किए जा रहे हैं।

व्यक्ति के मन में पॉजिटिविटी पैदा करता है तीर्थंकर वनम् का नाम

जीतो गुरुग्राम चैप्टर के चेयरमैन संजय जैन ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि तीर्थंकर वनम् अपने आप में एक ऐसा नाम है। इस नाम के सुनाई देने भर से ही हर व्यक्ति के मन में पॉजिटिविटी पैदा होने लगती है। जब कोई भी व्यक्ति यहां का भ्रमण करने के लिए आएंगे, तब यह अपनी ऊर्जा से हर किसी को एक बहुत ही अच्छा अहसास करवाएगा। उन्होंने कहा कि अरावली की हरियाली के बीच यह एक नया प्रयोग किया गया है। यह नया प्रयोग पूरी तरह से सफल रहेगा, ऐसी वे संस्था की तरफ से कामना करते हैं। उन्होंने अंत में कहा कि जो बीज आज यहां पर बोया गया है, वह कल को एक बहुत बड़ा वट वृक्ष बनकर तैयार होगा। यह वट वृक्ष उन सभी महापुरुषों का स्मरण कराएगा जिन्होंने एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना पूरा जीवन लगा दिया था।

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