हिसार : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में डॉ. दीपक कुमार तिवारी को मिला लुवास लाइब्रेरियन का प्रभार

लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) में पशु शल्य चिकित्सा एवं रेडियोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक कुमार तिवारी को विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन का प्रभार सौंपा गया है। इससे पहले यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आरएन चौधरी संभाल रहे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार डॉ. तिवारी आगामी आदेश तक लाइब्रेरियन के रूप में अपने कार्य करेंगे।
डॉ. दीपक कुमार तिवारी की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव
डॉ. दीपक कुमार तिवारी ने वर्ष 2006 में जेएनकेवीवी, जबलपुर से बीवीएससी एवं एएच की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2008 में एमवीएससी और वर्ष 2012 में आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद, गुजरात से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। वे वर्तमान में लुवास के पशु शल्य चिकित्सा एवं रेडियोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास पशु चिकित्सा शिक्षा और पशु शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में लंबा शिक्षण व अकादमिक अनुभव मौजूद है।
लाइब्रेरी के कार्य और शैक्षणिक गतिविधियों का महत्व
लुवास की लाइब्रेरी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती है। डॉ. तिवारी को लाइब्रेरियन का प्रभार मिलने से लाइब्रेरी के कार्यों में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को सभी आवश्यक शैक्षणिक एवं शोध संसाधन आसानी से उपलब्ध कराने में भी पूरी सहायता मिलेगी।
कुलपति और कुलसचिव की उपस्थिति एवं शुभकामनाएं
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा ने गुरुवार को डॉ. तिवारी को उनकी इस नई जिम्मेदारी के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान एवं शोध संसाधनों का एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि डॉ. तिवारी अपने शैक्षणिक एवं अकादमिक अनुभव का पूरा उपयोग करेंगे। इसके माध्यम से वे लाइब्रेरी के सभी कार्यों को बहुत प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएंगे। कुलपति ने गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों, शोध सामग्री और आधुनिक डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इनका प्रभावी उपयोग विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को और अधिक मजबूत बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. आरएन चौधरी तथा असिस्टेंट लाइब्रेरियन डॉ. अमनदीप भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।