लाडवा किसान मीट: नई तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आय?

किसान की आय बढ़ाने के लिए खेती में नई तकनीक और फसल विविधीकरण जरूरी: नायब सिंह सैनी
लाडवा में सीआईआई इनोवेटिव फार्मर्स मीट का समापन, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कृषि प्रदर्शनी का किया अवलोकन
मानव गर्ग/लाडवा /23 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
लाडवा-इन्द्री मार्ग पर एक निजी पैलेस में सीआईआई इनोवेटिव फार्मर्स मीट का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस कार्यक्रम का रिबन काटकर उद्घाटन किया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कृषि उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रगतिशील किसानों से सीधा संवाद किया है। इस सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने और खेती में नई तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया है।
- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लाडवा में सीआईआई इनोवेटिव फार्मर्स मीट का उद्घाटन किया है।
- किसानों की खुशहाली को हरियाणा की प्रगति का मुख्य आधार बताया गया है।
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नए पोर्टल और प्रशिक्षण केंद्रों की जानकारी दी गई है।
- पराली प्रबंधन और खेती की लागत कम करने के लिए किसान समूहों पर जोर दिया गया है।
किसानों की खुशहाली हरियाणा की प्रगति का आधार
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि किसानों की खुशहाली ही हरियाणा की प्रगति का मुख्य आधार है। खेती को बदलती हुई परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक तकनीक से जोड़कर ही किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि लाडवा की यह पावन धरती धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी पावन भूमि पर महाराजा कुरु ने स्वर्ण जडि़त हल चलाकर कृषि युग का ऐतिहासिक शुभारंभ किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान के खेत की खुशहाली सीधे तौर पर उसके परिवार की खुशहाली से जुड़ी हुई है।
सीआईआई इनोवेटिव फार्मर्स मीट का महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा है कि सीआईआई की पांचवीं इनोवेटिव फार्मर्स मीट का आयोजन लाडवा में होना बहुत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों, उद्योग प्रतिनिधियों और नई तकनीक उपलब्ध कराने वालों को सीधे किसानों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे किसानों को खेत में उपयोग होने वाली नई तकनीकों और मशीनरी की सटीक जानकारी मिल रही है। सीआईआई वर्ष 2014 से एग्रो टेक इंडिया के माध्यम से किसानों, उद्योगों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को आपस में जोड़ने का काम कर रही है। गांवों में पराली प्रबंधन, स्वच्छता और उपयोगी कृषि तकनीकों के प्रति लगातार जागरूकता पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
खेती के तौर-तरीकों में बदलाव और तकनीक का लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा है कि तकनीक तभी पूरी तरह सफल मानी जाएगी जब उसका वास्तविक लाभ किसान के खेत और उसकी आय में दिखाई दे। उन्होंने सभी किसानों से बदलते हुए मौसम, पानी की भारी कमी और मिट्टी की गिरती सेहत को देखते हुए खेती के तौर-तरीकों में आवश्यक बदलाव करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि धान और गेहूं की पारंपरिक खेती के साथ-साथ दलहन, तिलहन, सब्जियों और फलों जैसी अन्य फसलों की संभावनाओं पर भी पूरा विचार करना चाहिए। एक छोटा किसान हर महंगी मशीन अकेले नहीं खरीद सकता है। ऐसे में किसान समूह, सहकारी समितियां और किराये पर कृषि मशीन उपलब्ध कराने वाले केंद्र बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एक ही मशीन का लाभ कई अलग-अलग किसानों तक पहुंचने से खेती की कुल लागत कम होगी और गांवों में नए रोजगार पैदा होंगे।
प्राकृतिक खेती और पराली प्रबंधन के लिए सरकार के प्रयास
धान कटाई का समय नजदीक आने पर मुख्यमंत्री ने किसानों से पराली प्रबंधन की तैयारी पहले से ही शुरू करने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष पोर्टल शुरू किया है। करीब दो लाख किसानों ने लगभग तीन लाख एकड़ क्षेत्र के लिए अपना पंजीकरण करवाया है। इनमें से 44 हजार एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए 23 हजार 930 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है। वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में करीब 20 हजार 726 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की गई है। किसानों को उचित प्रशिक्षण देने के लिए कुरुक्षेत्र के गुरुकुल, जींद के हमेटी, सिरसा के मंगियाना और करनाल के घरौंडा में प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अब तक कुल 12 हजार 188 प्रतिभागियों को यह प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया और उनसे अपने अनुभव आसपास के किसानों के साथ साझा करने को कहा है। इस कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्याम सिंह राणा, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, नगरपालिका प्रधान साक्षी खुराना और चेयरमैन डॉ. गणेश दत्त सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे हैं।