चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को मिला 17 लाख रुपये का ग्रांट, प्रकृति संरक्षण और इकोटूरिज्म के लिए तैयार होगी स्किल्ड मैनपावर

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को मिला 17 लाख रुपये का ग्रांट, प्रकृति संरक्षण और इकोटूरिज्म के लिए तैयार होगी स्किल्ड मैनपावर

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के बायोसिएंसेज विभाग को पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (PSCST) से 17 लाख रुपये से अधिक का ग्रांट मिला है। यह ग्रांट पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के ग्रीन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम (GSDP) के तहत दिया गया है। इस ग्रांट का उद्देश्य नेचर कंज़र्वेटर-कम-इकोटूरिज्म गाइड पर एक तीन महीने का विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करना है। यह ट्रेनिंग प्रकृति संरक्षण, जिम्मेदार पर्यटन और ग्रीन आंत्रप्रेन्योरशिप में कुशल वर्कफोर्स तैयार करने के लिए है।

ट्रेनिंग प्रोग्राम की मुख्य बातें और संरचना

यह प्रोग्राम पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (PSCST) द्वारा अपने एनवायरनमेंटल इंफॉर्मेशन, अवेयरनेस, कैपेसिटी बिल्डिंग एंड लाइवलीहुड प्रोग्राम (EIACP) Hub के माध्यम से स्वीकृत किया गया है। इस कार्यक्रम में 20 प्रतिभागियों को क्लासरूम लर्निंग, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, फील्ड एक्सपोजर और आंत्रप्रेन्योरशिप-ओरिएंटेड स्किल डेवलपमेंट के जरिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

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बायोसिएंसेज विभाग के प्रमुख और प्रोग्राम के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रोफेसर (डॉ.) एलके अत्री ने बताया कि तीन महीने के इस कार्यक्रम में 35 से 40 प्रतिशत थ्योरी और 60 से 65 प्रतिशत प्रैक्टिकल और स्किल-बेस्ड लर्निंग शामिल होगी। प्रतिभागियों को बायोडायवर्सिटी असेसमेंट, फ्लोरा और फौना की पहचान, वाइल्डलाइफ और बर्ड ऑब्जर्वेशन, नेचर इंटरप्रिटेशन, इकोसिस्टम की समझ, सस्टेनेबल टूरिज्म प्लानिंग, और आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे क्षेत्रों में ट्रेनिंग दी जाएगी।

फील्ड विज़िट और प्रैक्टिकल लर्निंग

डॉ. एलके अत्री ने आगे बताया कि इस प्रोग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फील्ड-बेस्ड लर्निंग होगा। प्रतिभागियों को सिसवां इकोटूरिज्म प्रोजेक्ट, सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, चंडीगढ़ बायोडायवर्सिटी पार्क, छत्थबीर जूलॉजिकल पार्क, रोपड़ वेटलैंड, मोर्नी हिल्स, पिंजौर हेरिटेज गार्डन्स, टिंबर ट्रेल, ऑर्गेनिक फार्म्स, और हरिके वेटलैंड जैसे पारिस्थितिक और पर्यटन स्थलों का दौरा करने की उम्मीद है।

रोजगार और आजीविका के अवसर

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर (डॉ.) संदीप गुलेरिया ने कहा कि इस प्रोग्राम का एक निश्चित रोजगार परिणाम है, जिसमें प्रशिक्षित उम्मीदवारों को संबंधित क्षेत्रों में 50 प्रतिशत लाभप्रद प्लेसमेंट की आवश्यकता है। इससे ट्रेनिंग को केवल एकेडमिक सर्टिफ़िकेशन तक सीमित रखने के बजाय रोजगार और आजीविका सृजन को केंद्र में रखा गया है।

इस ट्रेनिंग से नेचर गाइडिंग, इकोटूरिज्म ऑपरेशंस, वाइल्डलाइफ और बर्डिंग एक्टिविटीज, रूरल टूरिज्म, होमस्टे मैनेजमेंट, हॉस्पिटैलिटी, और नेचर-बेस्ड आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे करियर के अवसर मिल सकते हैं। स्वीकृत राशि तीन महीने के रेजिडेंशियल ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए कोर्स मटीरियल, ट्रेनिंग किट्स, बोर्डिंग और लॉजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और फील्ड विजिट के खर्चों को कवर करेगी।

अकादमिया और सरकारी एजेंसियों का सहयोग

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के बायोसिएंसेज विभाग की डॉ. संगीता ने साझा किया कि इस पहल से अकादमिया, सरकारी एजेंसियों, कंज़र्वेशन संगठनों, टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है। इसका फील्ड-ओरिएंटेड डिज़ाइन प्रतिभागियों को प्रोटेक्टेड एरिया, वेटलैंड्स, और कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म मॉडल की सीधी समझ प्रदान करेगा। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के लिए यह ग्रांट वैज्ञानिक ट्रेनिंग, टूरिज्म एजुकेशन और लाइवलीहुड डेवलपमेंट को जोड़कर ग्रीन स्किल्स के साथ जुड़ाव का एक नया आयाम जोड़ता है।

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