चंडीगढ़ कैशियर मर्डर: जर्मनी से आए हथियार, तरनतारन में टेस्टिंग के बाद जानकीदास की हत्या

Atal Hind Team Online26 September 20263 min read3 viewsचंडीगढ़
चंडीगढ़ कैशियर मर्डर: जर्मनी से आए हथियार, तरनतारन में टेस्टिंग के बाद जानकीदास की हत्या

चंडीगढ़ के चर्चित जानकीदास हत्याकांड में पुलिस जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आया है। इस हत्या में इस्तेमाल किए गए आधुनिक हथियार देश के भीतर से नहीं, बल्कि जर्मनी में बैठे एक सप्लायर के जरिए पंजाब पहुंचाए गए थे। वारदात से पहले इन हथियारों की बाकायदा पंजाब के तरनतारन जिले में टेस्टिंग की गई थी।

चंडीगढ़ कैशियर मर्डर: जर्मनी कनेक्शन से सहमे लोग?

चंडीगढ़ /26 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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चंडीगढ़ की शांत फिजाओं में गूंजी गोलियों की तड़तड़ाहट और जानकीदास की सरेआम हत्या के पीछे एक ऐसा खौफनाक ताना-बाना बुना गया था, जिसके तार सात समंदर पार जर्मनी से जुड़े हैं। पुलिस की विशेष जांच टीम ने जब इस पूरे हत्याकांड की परतें उधेड़नी शुरू कीं, तो एक-एक करके ऐसे खुलासे हुए जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। यह महज एक स्थानीय रंजिश या लूटपाट की वारदात नहीं थी, बल्कि विदेशी धरती से संचालित हो रहे एक खौफनाक सिंडिकेट का सोचा-समझा हमला था।

जांच में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने के लिए शूटरों को जो हथियार मुहैया कराए गए थे, उनका इंतजाम जर्मनी में बैठे एक बड़े आर्म्स सप्लायर ने किया था। विदेशी सप्लायर ने अत्याधुनिक पिस्तौल और कारतूसों की खेप को बेहद गुप्त रास्तों से पंजाब सीमा में दाखिल कराया। इसके बाद स्थानीय नेटवर्क के जरिए यह खेप शूटरों तक पहुंचाई गई। इस पूरे चक्रव्यूह में पाकिस्तान की सीमा से सटे पंजाब के संवेदनशील जिलों का इस्तेमाल सुरक्षित गलियारे के रूप में किया गया था।

हथियारों की डिलीवरी मिलने के बाद आरोपियों ने सीधे चंडीगढ़ का रुख नहीं किया, बल्कि पंजाब के तरनतारन जिले में एक सुनसान ठिकाने पर जाकर इन हथियारों की बाकायदा टेस्टिंग की गई। निशानेबाजी का अभ्यास करने और हथियार की मारक क्षमता परखने के बाद ही शूटरों को चंडीगढ़ में जानकीदास की रेकी करने के लिए भेजा गया। तरनतारन में हुई इस मॉक ड्रिल से यह साफ होता है कि हमलावर किसी भी कीमत पर हमले को नाकाम नहीं होने देना चाहते थे।

घटना वाले दिन शूटरों ने रणनीति के तहत जानकीदास को निशाना बनाया और गोलियां बरसाकर मौके से फरार हो गए। चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच और एसआईटी ने जब घटनास्थल से मिले खोलों और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया, तो डिजिटल फोरेंसिक में कुछ ऐसे एन्क्रिप्टेड चैट और आईपी एड्रेस मिले, जिनका लोकेशन ट्रेस करने पर सीधा कनेक्शन जर्मनी से स्थापित हुआ। इसके बाद ही पुलिस इस केस में इंटरनेशनल आर्म्स सिंडिकेट की भूमिका को लेकर पुख्ता हुई है।

इस खुलासे के बाद अब पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसियों (NIA) को भी इस मामले से जोड़ा जा रहा है, ताकि जर्मनी में बैठे मुख्य साजिशकर्ता के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया जा सके। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय देशों में बैठकर भारतीय युवाओं को हथियारों की सप्लाई करना और फिर टारगेट किलिंग को अंजाम देना एक नया और बेहद खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। फिलहाल पुलिस टीम तरनतारन और चंडीगढ़ के कई इलाकों में छापेमारी कर स्थानीय मददगारों को दबोचने में जुटी हुई है।

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