फरीदाबाद की महापौर प्रवीण बत्रा जोशी ने SIR पर भ्रम फैलाने को लेकर कांग्रेस पर बोला तीखा हमला

फरीदाबाद नगर निगम की महापौर प्रवीण बत्रा जोशी ने NIT फरीदाबाद स्थित महापौर कार्यालय में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस प्रेस वार्ता में उन्होंने SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार चुनावी पराजयों के बाद अब चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। इस अवसर पर भाजपा जिला मीडिया प्रभारी विनोद गुप्ता, पार्षद एवं फाइनेंस कमेटी सदस्य मनोज नासवा और प्रदीप टोंगर उपस्थित रहे।
संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है कांग्रेस
महाप्रभु प्रवीण बत्रा जोशी ने कहा कि कांग्रेस कभी सर्वोच्च न्यायालय, कभी निर्वाचन आयोग और कभी ED तथा CBI जैसी संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। अब कांग्रेस SIR जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भी राजनीतिक विवाद का विषय बना रही है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस को हर संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने की आदत हो गई है। जब किसी फैसले या प्रक्रिया का राजनीतिक लाभ कांग्रेस के पक्ष में नहीं होता, तब वह संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगती है।
2019 के मामले का किया उल्लेख
श्रीमती जोशी ने संवैधानिक संस्थाओं के बारे में बिना तथ्य टिप्पणी करने के परिणामों का जिक्र किया। उन्होंने 2019 में ‘चौकीदार चोर है’ के नारे को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से जोड़ने के मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद राहुल गांधी ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी थी।
निर्वाचन आयोग के निर्णयों पर दी पूरी जानकारी
महापौर ने कहा कि निर्वाचन आयोग की हालिया पूरी बैठक और उसके बाद जारी प्रेस स्टेटमेंट के अनुसार SIR से जुड़े निर्णयों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। संबंधित आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र SIR या चुनावी नीति से संबंधित नहीं थे, बल्कि वे प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली से जुड़े थे। निर्वाचन आयोग के अनुसार SIR के मूल आदेश को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी और 2025-26 में जारी विभिन्न चरणों के कार्यक्रमों को भी आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी।
SIR का उद्देश्य और Form-6 पर स्थिति
श्रीमती जोशी ने स्पष्ट किया कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। SIR से मतदाता सूची की त्रुटि ठीक होती है और हर पात्र नागरिक को मत का अधिकार मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति है तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के साथ संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी बात रखनी चाहिए। Form-6 को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के हालिया स्पष्टीकरण के अनुसार SIR के लिए Form-6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
कांग्रेस का दोहरा रवैया और जनता से अपील
महापौर ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना हर राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होने चाहिए। जनता के बीच भ्रम और आशंका फैलाकर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना लोकतंत्र के हित में नहीं है। कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव हारती है तो EVM, निर्वाचन आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, लेकिन जब उसी व्यवस्था के माध्यम से उसे जीत मिलती है तो ऐसे सवाल दिखाई नहीं देते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछले तीन लोकसभा चुनावों में मिली हार को स्वीकार नहीं कर पा रही है। अंत में महापौर ने देश के नागरिकों से अपील की कि SIR से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और कांग्रेस तथा विपक्षी पार्टियों के झूठ व फरेब के झांसे में न आएं。