हिसार में जाति प्रमाणपत्र में नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध में भीम आर्मी ने सौंपा ज्ञापन

हरियाणा के हिसार में अनुसूचित जाति के एक वर्ग के जाति प्रमाणपत्र में चमार के स्थान पर मेघवाल शब्द का विकल्प दिए जाने के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रस्ताव के विरोध में भीम आर्मी ने शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर रोष जताया। संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रभारी अमित जाटव और जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट सुरेंद्र इंदल के संयुक्त नेतृत्व में उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने 23 अगस्त को बावल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार को इस संबंध में सिफारिश भेजने की बात कही थी।
संविधान के अनुच्छेद 341 का दिया हवाला
जिला प्रभारी अमित जाटव ने इस मौके पर कहा कि अनुसूचित जातियों की सूची में संशोधन करने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 341 में दर्ज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें बदलाव करने की पूरी प्रक्रिया संसद और राष्ट्रपति से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव आगे बढ़ाना संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए।
दलित समाज की एकता प्रभावित होने की आशंका
जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट सुरेंद्र इंदल ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी व्यापक सामाजिक सहमति के जातीय पहचान में बदलाव करने का यह प्रयास दलित समाज की एकता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की है। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री की इस घोषणा को वापस लेने की मांग की गई है। इसके अलावा अनुसूचित जातियों की संवैधानिक पहचान से जुड़े मामलों में पूरी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में उठाई गईं अन्य प्रमुख मांगें
भीम आर्मी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में दलित युवाओं के खाली पड़े बैकलॉग पद भरने और छात्रवृत्तियों का समय पर भुगतान करने की मांग भी शामिल है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को बहुत प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग उठाई गई है।
सरकार के खिलाफ प्रदेश स्तर पर आंदोलन की चेतावनी
भीम आर्मी के सभी नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी इन सभी मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो उनका संगठन पूरे प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के अगस्त महीने में दिए गए इस बयान के बाद से ही प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इस प्रस्ताव के विरोध में लगातार ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं और जोरदार प्रदर्शन किए जा रहे हैं।