शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती पर नरवाना में सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती पर नरवाना में सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

भगत सिंह के विचार आज भी प्रासंगिक :* कॉमरेड सुरेन्द्र मलिक

119वीं जयंती पर शहीद भगत सिंह अध्ययन केन्द्र, नरवाना में हुआ सेमिनार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम

नरेंद्र जेठी /नरवाना 28 सितंबर 2026 / अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स

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शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर आज शहीद भगत सिंह अध्ययन केन्द्र नरवाना में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भगत सिंह के विचारों का भारत और वर्तमान दौर विषय पर एक सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संचालन समिति के वरिष्ठ सदस्य मा. धर्मपाल चहल एवं राजबाला ने की। मंच का सफल संचालन महिला नेत्री जगवंती ने किया।

मुख्य वक्ता के विचार

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, पूर्व छात्र नेता और राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड सुरेन्द्र मलिक ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का जीवन केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष तक ही सीमित नहीं था।

वे एक ऐसे समाज और भारत का निर्माण करना चाहते थे जिसमें हर तरह के शोषण, असमानता, साम्प्रदायिकता और जातिगत भेदभाव के लिए कोई स्थान न हो। उनके विचारों को आज के सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में समझना बहुत जरूरी है।

वर्तमान दौर में प्रासंगिकता

आज जब समाज विभिन्न प्रकार की असमानताओं और विभाजनों का सामना कर रहा है। तब भगत सिंह के साम्प्रदायिक सौहार्द, भाईचारे, सामाजिक न्याय और मानवीय समानता के विचारों को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि भगत सिंह ने अपने लेखन और राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से वैज्ञानिक सोच, तर्कशीलता, सामाजिक समानता और शोषण मुक्त समाज की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसलिए उन्होंने अपने संगठन में समाजवादी शब्द को जोड़कर नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन रखा था।

अदालत और शहादत से जुड़े तथ्य

उन्होंने अपना मुकदमा खुद लड़कर अदालत में भी क्रान्ति के असली मक़सद को देश के सामने बताया था। उनकी शहादत के बारे में यह तथ्य भी है कि मौत की सजा के बाद उनका वजन बढ़ गया था।

इसलिए उनकी जयंती केवल उन्हें याद करने का अवसर नहीं है। यह उनके विचारों पर चर्चा करने और वर्तमान परिस्थितियों में उनकी प्रासंगिकता को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भागीदारी

कार्यक्रम के दौरान जयपाल दनौदा, लीलू बडनपुर, प्रदीप शर्मा, भीम सिंह शर्मा, सुरेन्द्र बनारसी, रामकुमार और डॉ. भरत सिंह आदि कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। इन कलाकारों ने क्रांतिकारी एवं देशभक्ति की बेहतरीन रागनियों, गीतों और कविताओं के माध्यम से भगत सिंह के विचारों और संघर्ष को प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में मा. बलबीर सिंह, मा. सतबीर सिंह, मा. चांद बहादुर, सोहन दास, मा. बलजीत सिंह, सतबीर खरल, मा. होशियार सिंह, सुरेश कुमार, नरेश दनौदा, मा. प्रमोद कुमार, डिम्पल, विक्रम सिंह, माया, शांति, अनिता कर्मगढ़ और दलेल राणा ने हिस्सा लिया। इसमें बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, विद्यार्थियों तथा शहर के नागरिकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का समापन राजबाला द्वारा इंकलाब-जिंदाबाद, साम्राज्यवाद-मुर्दाबाद और समाजवाद-जिंदाबाद के नारों के साथ किया गया।

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