अम्बाला के बराड़ा शहर में सफाईकर्मियों की हड़ताल के बाद लगे गंदगी के ढेर, नगर पालिका कार्यालय परिसर भी शामिल

अम्बाला जिले के बराड़ा शहर में सफाईकर्मियों की लंबी हड़ताल के बाद पूरे शहर में गंदगी के ढेर लग चुके हैं। बराड़ा शहर के बाजारों से लेकर नगर पालिका कार्यालय तक हर तरफ कूड़े का अंबार दिखाई दे रहा है। मुख्य बाजार से लेकर विभिन्न कॉलोनियों की गलियों तक गंदगी का बुरा आलम बना हुआ है। स्थिति यह है कि शहर में सफाई व्यवस्था बनाए रखने वाले नगर पालिका कार्यालय के प्रांगण में भी कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
- सफाईकर्मियों की लंबी हड़ताल के कारण बराड़ा शहर में चारों तरफ कूड़े के ढेर लग गए हैं।
- नगर पालिका कार्यालय के प्रांगण और मुख्य बाजार से लेकर कॉलोनियों की गलियों तक गंदगी फैली है।
- डंपिंग ग्राउंड तक पक्का रास्ता न होने और टेंडर कम होने के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
बराड़ा शहर की जनसंख्या और सफाई के आंकड़े
बराड़ा के 16 वार्डों में करीब एक लाख से ज्यादा की जनसंख्या निवास कर रही है। बराड़ा में करीब 24 हजार मतदाता हैं। क्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से बराड़ा का लगातार विस्तार हो रहा है। लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि सफाई व्यवस्था के लिए टैंडर कम हैं। यह सभी आंकड़े बराड़ा शहरी क्षेत्र के स्थाई निवासियों के हैं। जबकि बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने बराड़ा के आसपास के गांवों से आकर शहर में अपने घर बना लिए हैं। इन लोगों की वोट अभी भी गांवों में ही हैं। इन लोगों को बराड़ा की मतदाता गिनती में नहीं गिना जाता है। जबकि ऐसे लोगों के काफी संख्या में घर बनाने से बराड़ा का दायरा और विस्तार हुआ है। सुविधाओं की जरूरत इन लोगों को भी उतनी ही है। लेकिन नगरपालिका का ठेका यहां के मतदाताओं के हिसाब से ही दिया जाता है।
चेयरमैन और अधिकारियों के निर्देश
चेयरमैन रजत मलिक के अनुसार बीते कल अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण मीटिंग की गई थी। इस मीटिंग में अधिकारियों से कहा गया कि सफाई कार्य हर हाल में तुरंत शुरू होना चाहिए। चूंकि अब नए नियमों के अनुसार सफाई का ठेका पांच साल के लिए कर दिया गया है। ऐसे में जब तक उस बड़े ठेके की मंजूरी नहीं मिलती, तब तक सफाई कार्य के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होगी। इसके लिए एक महीने के समय के लिए एक लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। यदि दो दिन के भीतर सफाईकर्मियों की समस्या का हल नहीं निकला और पांच साल के टैंडर को अमलीजामा नहीं पहनाया गया, तो जल्द ही एक लाख रुपए के बजट से कुछ सफाईकर्मियों को काम पर रखकर सफाई कार्य करवाए जाएंगे।
डंपिंग ग्राउंड तक जाने के रास्ते की समस्या
यह एक उल्लेखनीय तथ्य है कि करीब 13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए 16 वार्ड हैं। इन वार्डों में करीब 9 हजार मकान और लगभग 90 हजार की आबादी निवास करती है। बराड़ा शहर की सबसे बड़ी समस्या शहर से उठाए गए कूड़े को सही जगह पर गिराने की है। नगरपालिका का अपना डंपिंग ग्राउंड दादुपुर रोड पर सज्जन माजरी गांव के पास स्थित है। लेकिन इस डंपिंग ग्राउंड में जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। सड़क से लेकर डंपिंग ग्राउंड तक के रास्ते में स्थानीय किसान की निजी जमीन पड़ती है। यदि खेत खाली होते हैं, तब तो कूड़े की गाड़ी आसानी से निकल जाती है। लेकिन यदि खेत में कोई फसल खड़ी होती है, तो गाड़ी निकलने में बहुत बड़ी परेशानी पैदा हो जाती है। ऐसे में इस डंपिंग ग्राउंड के लिए एक स्थाई रास्ते का समाधान होना बेहद जरूरी है। इस संबंध में नगरपालिका चेयरमैन रजत मलिक का कहना है कि स्थाई रास्ते का हल जल्द से जल्द निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नपा सचिव मोहित सैनी का बयान और नए टेंडर
नपा सचिव मोहित सैनी ने पूरी स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए पिछला एक वर्ष का ठेका अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह नियमित करने के लिए अब पांच वर्ष का एक नया टेंडर लगाया गया है। इस नए टेंडर की फाइल रेट अप्रूवल के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी के समक्ष भेजी जा चुकी है। कमेटी से मंजूरी मिलते ही पांच वर्ष के लिए डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की नई व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। शहर की सड़कों की सफाई व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने के लिए 6 महीने का रोड स्वीपिंग का टेंडर भी लगाया जा चुका है। यह रोड स्वीपिंग का टेंडर करीब एक सप्ताह के भीतर खुलने की पूरी संभावना है। रोड स्वीपिंग का काम शुरू होने के बाद सड़कों पर नियमित सफाई सुनिश्चित होगी। इसके बाद शहर से गंदगी की समस्या काफी हद तक कम होने की पूरी उम्मीद है। नपा सचिव के अनुसार पांच वर्ष का डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और रोड स्वीपिंग व्यवस्था शुरू होने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था से जुड़ी अधिकांश समस्याओं का एक स्थाई समाधान हो सकेगा।