अशोक सिंघल का योगदान अविस्मरणीय: जगद्गुरु नरेंद्रानंद, हिंदू एकता और समरसता पर दिया जोर

हिंदू एकता, समरसत के लिए अशोक सिंघल का योगदान अविस्मरणीय-जगद्गुरु नरेंद्रानंद
वीएचपी के वरिष्ठ नेता एवं राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे अशोक सिंघल
जाति, भाषा, प्रांत से ऊपर उठकर सनातन हिंदू समाज की एकजुटता का संदेश
अशोक सिंघल का अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति का संघर्ष महत्वपूर्ण
अशोक सिंघल के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया गया
फतह सिंह उजाला /गरुग्राम /28 सितंबर 2026 / अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता एवं राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उनके जीवन, व्यक्तित्व और हिंदू समाज के लिए किए गए कार्यों को स्मरण किया गया। इस कार्यक्रम में हिंदू एकता और समरसता के लिए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया गया। कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
- वीएचपी के वरिष्ठ नेता एवं राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे अशोक सिंघल
- जाति, भाषा, प्रांत से ऊपर उठकर सनातन हिंदू समाज की एकजुटता का संदेश
- अशोक सिंघल का अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति का संघर्ष महत्वपूर्ण
- अशोक सिंघल के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया गया
अशोक सिंघल का जीवन और संघर्ष
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि अशोक सिंघल का जीवन हिंदू समाज के जागरण और अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के संघर्ष का महत्वपूर्ण अध्याय है। राम मंदिर आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में अशोक जी की अहम भूमिका रही। उन्होंने हिंदू समाज में जागरण, एकरूपता और समरसता को आधार बनाकर समाज के विभिन्न वर्गों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने जाति, भाषा और प्रांत के भेद से ऊपर उठकर सनातन हिंदू समाज को एकजुट करने का संदेश दिया। देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदू समाज को संगठित करने और उनमें आत्मविश्वास तथा जागरण की भावना पैदा करने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा।
विचार आज भी प्रासंगिक और विचारणीय
शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में भी अशोक सिंघल के विचार प्रासंगिक हैं। हिंदू समाज और सरकार यदि उनके विचारों को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ें तो सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत किया जा सकता है। समान शिक्षा नीति, गोहत्या पर प्रतिबंध, गंगा की अविरलता एवं निर्मलता, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने जैसे विषयों को लेकर अशोक ने समाज में जागरूकता का जो संदेश दिया था, वह आज भी विचारणीय है।
उन्होंने धर्मांतरण के विषय पर भी कठोर कानून और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सनातन समाज को जाति, भाषा और प्रांत के भेद से ऊपर उठकर एकजुट होकर अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए कार्य करना चाहिए। अशोक सिंघल का जीवन समाज में इसी प्रकार की संगठनात्मक और प्रतिरोधात्मक शक्ति खड़ी करने की प्रेरणा देता है।
हिंदू समाज के प्रति अतुलनीय योगदान
इस अवसर पर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक रमेश ने अशोक सिंघल के जन्म से लेकर उनके जीवन के अंतिम चरण तक के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अशोक के व्यक्तित्व, संगठन क्षमता, सामाजिक समर्पण और हिंदू समाज के प्रति उनके योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में स्थानीय बार एसोसिएशन के राधे मोहन, विश्व हिंदू परिषद के सैकड़ों कार्यकर्ता, क्षेत्र के प्रधान, प्रमुख, ब्लॉक प्रमुख, पूर्व विधायक सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विश्व हिंदू परिषद के पवन देव ने व धन्यवाद ज्ञापन विधायक सुशील सिंह ने किया।