फरीदाबाद में आनंदमूर्ति गुरूमां के चार दिवसीय ज्ञान, भक्ति और योग समागम का समापन

संत की संगत और समागम का श्रवण व्यक्ति का जीवन बदल सकता : आनंदमूर्ति गुरूमां
चार दिवस ज्ञान, भक्ति, योग की अमृतवर्षा समागम का हुआ समापन
योगेश गर्ग /फरीदाबाद /04 अक्तूबर/अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
संत की संगत और समागम का श्रवण व्यक्ति का जीवन बदल सकता है। फरीदाबाद के एनआईटी स्थित दशहरा ग्राउंड में ऋषि चैतन्य विजन फरीदाबाद द्वारा ज्ञान, भक्ति, योग की अमृतवर्षा समागम का चार दिवसीय आयोजन किया गया था जिसका अब समापन हो गया है। इस समागम के चौथे और अंतिम दिन परमपूज्य आनंदमूर्ति गुरूमां ने भक्तों से खचाखच भरे पंडाल में समागम को संबोधित किया।
संत का दरबार और गुरु का स्थान
संत का दरबार ईश्वर का द्वार होता है। इस द्वार पर अहंकार से नहीं बल्कि विनम्रता से संत के मार्गदर्शन में जीवन की परिस्थितियों को बदला जा सकता है। संत ही मनुष्य को प्रभु से जोडऩे का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए गुरू का स्थान हमेशा ईश्वर से ऊपर माना गया है।
जीवन का सार्थक अर्थ और कर्म प्रधान जीवन
व्यक्ति माटी का पुतला है जिसे आखिर में मिट्टी में ही मिल जाना है। मिट्टी में मिलने से पूर्व उसे ज्ञान की धारा से जुडऩा, सत्संग और समागम का हिस्सा बनना और दूसरों को राह दिखाना ही सार्थक जीवन कहलाता है। आशीर्वाद के विषय पर बोलते हुए गुरूमां ने स्पष्ट किया कि अधिकतर लोग संतों से आशीर्वाद की अपेक्षा करते हैं जोकि गलत है। जीवन में हमेशा कर्म प्रधान होता है और जब तक कर्म नहीं किया जाएगा तब तक आशीर्वाद का कोई मायने नहीं रखता है।
भक्ति और ईश्वर से प्रेम
संत हमेशा अज्ञान का पर्दा उठाकर व्यक्ति को ज्ञान की ओर जोड़ता है। ज्ञान के द्वारा ही प्रभु की भक्ति में मन लगाने के लिए प्रेरणा मिलती है और तब जाकर कर्म ही आशीर्वाद का रूप ले लेता है। ऐसे में हम अपने आत्मस्वरूप का बोध करते हैं और हमारा मन बहुत आनंदित होता है यही व्यक्ति की वास्तविक सिद्धि है। मन को एकाग्र करना, परमात्मा से प्रीत बढ़ाना और उनके प्रेम की मस्ती में झूमना ही सहज परमात्मा की भक्ति है।
ऋषियों का देश और सही मार्गदर्शन
भारत ऋषियों का देश है और ऋषियों ने वेदों में परमात्मा से मिलने का ज्ञान समाहित किया है। हमें हमेशा उनके आदर्शों पर ही चलना चाहिए। आज के समय में लोग तत्काल लाभ के चक्कर में भ्रमित होकर शार्ट कट का रास्ता पकडऩे का प्रयास करते हैं, जिससे बाद में उन्हें केवल पछताना पड़ता है। जीवन को सफल बनाने के लिए सही मार्ग दर्शन की बहुत आवश्यकता होती है और यह मार्गदर्शन केवल एक संत ही दिखा सकता है।
ईश्वर से पहचान और अतिथियों का स्वागत
ज्ञान पाने के बावजूद भी यदि ईश्वर की स्मृति नहीं की तो वह ज्ञान अज्ञान में बदल जाता है। आज देश के लोग अपनी पहचान बिरादरी, जाति और प्रदेश से बताने का प्रयास करते हैं जबकि हमारी असली पहचान तो केवल ईश्वर से है। इस कार्यक्रम से पूर्व बडखल विधानसभा के विधायक धनेश अदलक्खा, पूर्व महापौर सुमन बाला एवं ऋषि चैतन्य विजन के कार्यकर्ताओं ने पूज्य आनंदमूर्ति गुरूमां का पुष्प गुच्छ देकर भव्य स्वागत किया।