कानून की जानकारी ही नागरिक की सबसे बड़ी ताकत है: एडवोकेट मनोज गांधी

कानून की जानकारी ही नागरिक की सबसे बड़ी ताकत : एडवोकेट मनोज गांधी
बोले : अधिकारों के साथ कर्तव्यों को समझना भी जरूरी, जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज की नींव
युवाओं को कानून की जानकारी देकर अपराध से दूर रखने की जरूरत
तरावड़ी / 19 सितंबर 2026 /अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स/रोहित लामसर
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष एडवोकेट मनोज गांधी ने कहा है कि कानून की जानकारी ही नागरिक की सबसे बड़ी ताकत है। आज के बदलते दौर में प्रत्येक नागरिक के लिए अपने कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। कानून केवल अदालतों और वकीलों तक सीमित विषय नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति के दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ है। जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझता है, तभी समाज में कानून के प्रति सम्मान और व्यवस्था मजबूत होती है।
युवाओं को कानून की जानकारी देकर अपराध से दूर रखने की जरूरत
एडवोकेट मनोज गांधी ने कहा कि कई बार लोग जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते हैं। कई परिस्थितियों में लोग अनजाने में ऐसी गलती कर बैठते हैं, जिसका कानूनी प्रभाव बाद में सामने आता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को कानून की बुनियादी जानकारी हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद या कानूनी समस्या की स्थिति में जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कानून विशेषज्ञ से सलाह लेना समझदारी है। उन्होंने कानून से डरने की नहीं, कानून को समझने की जरूरत है का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एक जागरूक नागरिक न केवल स्वयं सुरक्षित रहता है, बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी सही दिशा दिखा सकता है। छोटी-छोटी कानूनी जानकारियां कई बार व्यक्ति को बड़ी परेशानी से बचा सकती हैं।
सोशल मीडिया और डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान
मनोज गांधी ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। आज का युवा वर्ग सोशल मीडिया और इंटरनेट से तेजी से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उन्हें डिजिटल व्यवहार, साइबर कानून, ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री साझा करने और निजी जानकारी की सुरक्षा जैसे विषयों के प्रति भी जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों से अपील की कि वे युवाओं के बीच समय-समय पर कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल अधिकारों की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी समझाना होगा कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी जुड़ी होती है। सोशल मीडिया पर कोई भी सामग्री साझा करने से पहले उसकी सत्यता और उसके कानूनी प्रभाव को समझना चाहिए। किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली या भ्रामक जानकारी को बिना पुष्टि के आगे बढ़ाना भी गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।
सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन
एडवोकेट गांधी ने सड़क सुरक्षा को लेकर कहा कि ट्रैफिक नियमों का पालन केवल पुलिस के डर या चालान से बचने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यह नियम अपनी और दूसरों की जिंदगी सुरक्षित रखने के लिए होते हैं। दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और कार में सीट बेल्ट का इस्तेमाल आदत बनना चाहिए। उन्होंने तेज रफ्तार और लापरवाही को सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि कुछ मिनट बचाने की जल्दबाजी जिंदगी भर का नुकसान कर सकती है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे नाबालिग बच्चों को वाहन देने से पहले सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की गंभीरता समझाएं। उनका कहना था कि कानून का पालन घर से शुरू होता है और परिवार ही बच्चे के लिए पहली पाठशाला है।
निशुल्क कानूनी सहायता और विवादों का समाधान
मनोज गांधी ने कहा कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कोई व्यक्ति न्याय पाने के अधिकार से वंचित न रहे, इसके लिए निशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था मौजूद है। कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी कानूनी समस्या को लेकर चुप रहने या गलत व्यक्ति के झांसे में आने के बजाय अधिकृत कानूनी माध्यम से सहायता लें। उन्होंने कहा कि समाज में कई विवाद केवल इसलिए बढ़ जाते हैं क्योंकि लोग समय रहते सही कानूनी सलाह नहीं लेते हैं। यदि किसी समस्या का समाधान कानून के दायरे में रहते हुए बातचीत और उचित कानूनी प्रक्रिया से किया जाए, तो कई विवादों को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि कानून केवल पुलिस, प्रशासन या न्यायपालिका की जिम्मेदारी नहीं है। कानून का सम्मान और पालन समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे, तो अपराध और विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने युवाओं, सामाजिक संस्थाओं और शिक्षण संस्थानों से मिलकर कानूनी जागरूकता अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही वह माध्यम है, जिसके जरिए नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से निभा सकते हैं।